my-server
← Wiki

Raysipotra

The Raysipotra or Raisipotra () is a Sindhi Muslim Sammat clan of Dal tribe found in the state of Gujarat in India and the province of Sindh in Pakistan. They are one of a number of communities of pastoral nomads found in the Banni region of Kutch.

रायसीपोत्रा (जिसे 'रायसीपुत्र' भी कहा जाता है) सांधी मुस्लिम समुदाय का एक प्रमुख और ऐतिहासिक कबीला है। यह मुख्य रूप से भारत के गुजरात राज्य के कच्छ (विशेषकर बन्नी क्षेत्र) और पाकिस्तान के सिंध प्रांत में निवास करता है।

इतिहास और उत्पत्ति

रायसीपोत्रा कबीले की जड़ें सिंध के ऐतिहासिक सम्मा वंश से जुड़ी हैं। कबीले का नाम उनके पूर्वज रायसी (Raysi) के नाम पर पड़ा है। पारिवारिक और मौखिक परंपराओं के अनुसार, सिंध में इस कबीले को धर्श (Dharsh) के नाम से जाना जाता था। मध्यकाल के दौरान, चरागाहों की खोज और राजनीतिक कारणों से यह कबीला सिंध से प्रवास कर कच्छ के बन्नी घास के मैदानों में बस गया।

आध्यात्मिक पहचान और 'फकीर' का दर्जा

कबीले के मूल बुजुर्ग, रायसी, अपनी अत्यधिक दयालुता, परोपकार और धार्मिक निष्ठा के लिए प्रसिद्ध थे। उनके रूहानी व्यक्तित्व के कारण समाज में उन्हें फकीर का दर्जा प्राप्त हुआ। रायसीपोत्रा समुदाय आज भी अपने पूर्वज की इस विरासत को अपनी पहचान का हिस्सा मानता है।

उमरानी (Umranni) शाखा

कच्छ के बन्नी क्षेत्र में रायसीपोत्रा कबीले की एक प्रतिष्ठित उप-शाखा को उमरानी के नाम से जाना जाता है। इस शाखा का नाम कबीले के एक प्रमुख बुजुर्ग रायसीपोत्रा उमर (Raysipotra Umar) के नाम पर पड़ा है। वर्तमान में, रायसीपोत्रा इस्माइल (जिन्हें उमरानी इस्माइल के नाम से जाना जाता है) इस परंपरा के एक मुख्य संरक्षक माने जाते हैं। उनकी पहचान उनके विशिष्ट खाकी पहनावे और परंपरागत 'पाघ' (पगड़ी) से जुड़ी है।

अर्थव्यवस्था और जीवनशैली

रायसीपोत्रा कबीला पारंपरिक रूप से पशुपालन (Pastoralism) से जुड़ा है। वे विशेष रूप से 'बन्नी भैंस' और गीर नस्ल की गायों के पालन और उनके आनुवंशिक संरक्षण के लिए जाने जाते हैं। कबीले की महिलाएं कच्छी कढ़ाई (Embroidery) और हस्तशिल्प में निपुण होती हैं।

इन्हें भी देखें

संदर्भ

References